Alzheimer (Hindi)

धुँधलाती स्मृतियाँ तुम अब कहाँ हो, प्रिये? उस स्त्री में तो नहीं जिसने मेरे संग साठ बरस बिताए। वह तो धीरे-धीरे धुँध के उस पार चली गई है, जहाँ बच्चों के नाम नहीं पहुँचते, जहाँ कल की बातें सुबह तक जीवित नहीं रहतीं। अब तो कभी एक किशोरी लौट आती है— रंगों की किताब लेकर, … Continue reading Alzheimer (Hindi)